7 Strategies Grow your Business in Hindi

7 Strategies Grow your Business in Hindi-7 step of Billon Dollour Business

7 Strategies Grow your Business in Hindi- ये 7 स्ट्रेटेजीज जो आपके बिज़नस के ग्रोथ के लिए आवश्यक है

7 Strategies Grow your Business in Hindi
7 Strategies Grow your Business in Hindi

1- Repeatable business model- PPT

p- people-process oriented

P-process- accurate, consistent, efficient

T- Technology- speed, scale  

ऐसा बिजनेस मॉडल जिसको रिपीट किया जा सके PPT मतलब – First P– ऐसे लोग होने चाहिए जो प्रोसेस ओरिएंटेड हो, हाई क्लास कैसे हायर करें Second P का मतलब- प्रोसेस, हर काम को प्रोसेस में कैसे डाल दे, आपको वहां ना बैठना पड़े, आपको गल्ले पर ना बैठना पड़े वह होनी चाहिए, एफिशिएंट एक्यूरेट प्रोसेस कैसे बनाया जाए, पहली बार में ठीक काम आए कंसर्नटेंस, हर बार एक जैसा हो,

ऐसा ना हो, कि कभी आ रहा है काम आपका 100/100 और कभी आ रहा है 80/100 कभी आ रहा है 50/100 एक जैसा रिजल्ट आए और एफिशिएंट स्पीड के साथ रिजल्ट आए इसको कहते हैं प्रोसेस

T– मतलब टेक्नोलॉजी यानी कि आपके बिना आपकी मैन पावर स्पीड और इस सही के साथ काम करे, ऐसी टेक्नोलॉजी हो, आपका बिजनेस बढ़ता चला जाए, सबसे बढ़िया टेक्निक वही है, जो टेक्नोलॉजी को ढंग से इस्तेमाल कर सके, आपके प्रोसेस और टेक्नोलॉजी इसको बोलते हैं

PPT वरना आप को गल्ले में बैठना पड़ेगा, क्योंकि डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट अपने बिजनेस को ग्रोथ नहीं कर पाते क्योंकि उनको अपने गल्ले पर बैठना पड़ता है या अपने ऑफिस में बैठना पड़ता है

2- RGB Dashboard(RGB डैशबोर्ड) का मतलब होता है कि ऐसा डैशबोर्ड बना दो, जिसमे रेड, ब्लू और ग्रीन मार्क हो- आपके पास जितने भी डिपार्टमेंट हैं, आपको हर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट शाम को, और कुछ ऐसी होनी चाहिए जिनकी रिपोर्ट वीकेंड में और रिपोर्ट नंबर के फॉर्मेट में हो, अब बात आती है कि रेड क्या है, ब्लू क्या है, ग्रीन क्या है

एक -एक कर्मचारी को उसका रोल क्या है और उसके गोल क्या है, कंपनी में हर आदमी को पता होना चाहिए कि उसका रोल क्या है और गोल क्या है, मतलब उसका की परफॉर्मेंस इंडिकेटर क्या है और उसकी रिपोर्ट जनरेट होने शुरू हो जाए, कैसे और रेड हो, ब्लू हो, या ग्रीन हो,

उस पर कलर भी डाल दो जिससे आपका रेड कलर से ध्यान जाए, ब्लू से जाए और ग्रीन अलग से जाए

 रेड का मतलब बिल्कुल Low परफॉर्मेंस, वेरी क्रिटिकल यह डिपार्टमेंट बहुत स्लो चल रहा है ब्लू का मतलब है- पार्शियल्टी कंट्रोलड -यह सही चल रहा है, इससे आप चाहते हो कि 100 का काम करें 90- 95 कर रहा है और ग्रीन का मतलब है- फुली कंट्रोल 100 को 120 देता है, 100 को 110 देता है यह हो गया सेट ब्लूग्रीन हर शाम को रिपोर्ट निकल कर आ जाए अगर आपका डिजिटल मार्केटिंग डिपार्टमेंट है तो वह कितनी लीड्स जनरेट कर रहा है 100 करनी थी 120 कर रहा है मतलब ग्रीन है 100 करनी थी वह 90 का है तो ब्लू है और 100 करनी थी वह 50 कर रहा है तो उसका रेड है, तो साथ में नंबर के साथ कर डाल दो, इससे आपको रोज शाम को पता लग जाएगा की हालत कैसी चल रही है, आप क्रिटिकल कंडीशन को कंट्रोल कर सकते हो, उन पर तुरंत मीटिंग करनी चाहिए, जो ब्लू है उसमें हर तीसरे दिन मीटिंग करिए और जो ग्रीन पर है हर हफ्ते मीटिंग करिए ताकि ग्रीन मेंटेन रहे, ब्लू इंप्रूव करें और रेड है तो सेंटफ्रॉम करें तभी आप इसमें नई ग्रोथ ला सकते हो

3CGP Safety Trinity(CGP सेफ्टी ट्रिनिटी) यह बड़ा इंपॉर्टेंट है, कैश- ग्रोथ और प्रॉफिट यह ट्रायंगल होता है, इनका आपस में कोई रिलेशन नहीं है, अगर आपको बिजनेस रीमोटली रन करना है इन तीन चीजों को पकड़ लो हर हफ्ते आपका हिसाब से

कैश कितना आया, ग्रोथ कितना हुआ पिछले हफ्ते के मुकाबले और प्रॉफिट कितना है यह तीनों अलग चीज है 1 -ऐसा हो सकता है कि आपके बिजनेस में कैश आए(जो माल बेचा उससे पैसा आ गया), ग्रोथ भी हो रहा है लेकिन मार्जन नहीं था, जितने का बनाया उसने का ही बेच दिया, लेकिन आपके मार्जन नहीं बने

2- दूसरी तरफ ऐसा भी हो सकता है ग्रोथ हो रही हो(मतलब सेल बहुत), प्रॉफिट भी बहुत आ रहा हो यानी अपने 100 की चीज 120 में बेच दी, पर उधार में बेच दी, कैश नहीं आ रहा है तो ग्रोथ है, प्रॉफिट है, लेकिन कैश नहीं है

3- तीसरा ये भी क्या हो सकता है कि आपके बिजनेस में प्रॉफिट है (100 की 120 में बेच दी, कैश भी है तुरंत आ रहा है, लेकिन ग्रोथ नहीं हो रहा, पिछले महीने के मुकाबले, पिछले महीने की सेल अच्छी थी, लेकिन अब सेल गिर गई, आपको तीनों चीजें कंट्रोल करनी है, उसके बाद आपके डिपार्टमेंट बदलेंगे, इसको बोलते CGP जिसकी तीनो में कमांड अच्छी हो जाती है वह बिज़नस मल्टीनेशनल बन जाता है आपको CGP देखना है करंट महीने का, पिछले 3 महीने का

Productivity Tracker- (प्रोडक्टिविटी ट्रैकर) सारे एंप्लोई, आपके पीछे से क्या कर रहे हैं, आपको अपने आप पता होना चाहिए, अगर आप अपने 2 दिन जाओ ऑफिस, बाकी दिन काम अपने आप बढ़िया चल रहा होता है, सारे की प्रोसेस अपने आप चल रहे हो, अगर आपके पर टेक्नोलॉजी नहीं है, तो आप ट्रैक नहीं कर पाओगे इसलिए आपको प्रोडक्टिविटी सॉफ्टवेयर लगाने होंगे, ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर रखनी चाहिए, जिसके द्वारा आप को पल भर में पता लग जाएगा, कौन काम कर रहा है और कौन नहीं कर रहा है, HRM के सॉफ्टवेयर आते हैं, अप्रेजल ट्रैक कर सकोगे, उनकी प्रोडक्टिविटी, एफिशिएंसी चेक कर सकोगे, आप अपने टाइम को अनलॉक कर सकते हो. एक एंप्लॉय पर ₹50 या ₹100 का चार्ज आता है और सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाता है, आपके बन्दे कब काम कर रहे हैं, कब लॉगिन कर रहे हैं, कब लॉग आउट कर रहे हैं, काम कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं,

आप उनके रिसोर्सेज का पूरा प्लान कर सकते हो, आप उनके परफॉर्ममैन्स को मॉनिटर कर सकते हो, आप इसकी तनख्वाह बढ़ानी है या घटानी है, आप पूरा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कर पाओगे कि आप अपने काम को अचीव कर पाओगे कि नहीं, आप रियल टाइम मतलब कभी भी देख सकते हो कि इन कर्मचारी काम सही कर रहे हैं या नहीं, आप पूरा मॉनिटर कर सकते हो कि वायलेंस, कोई चीटिंग तो नहीं कर रहा है कोई कामचोरी तो नहीं कर रहा है, कई होते हैं टाइम से टाइप होते हैं To-Do ऐप होते हैं आपकी सारी ट्रैकर ऐप यूज कर सकते हैं, उसका यह काम था, उसने किया ही नहीं या नहीं किया, आप उनकी पार्टी कूलर एक्टिविटीज पर कितना खर्चा हुआ, उनके प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कैसा चल रहा है, टाइम मैनेजमेंट कैसा चल रहा है, ऑप्टिमाइजेशन है कि नहीं, बहुत सी है बातें “टॉगल” है, “टाइमकैंप” है इससे आपका समय भी बचेगा और आपको टेक्नोलॉजी का भी सही उपयोग हो पाएगा

Main thing V/S multiple things- बहुत सारे काम करना- आपका लक्ष्य मेन चीज पर होना चाहिए अर्थ है कभी तबीयत ठीक नहीं हो रही, कभी ब्रेक हो रहा है, कभी रिओरियंटेशन नहीं हो रहा है, दिमाग में पचास चीजें चलती है, काम ऐसा होना चाहिए जिसमें 50 के बराबर रिजल्ट एक बार में ही मिल जाए

जो बड़े गोल है वह फर्स्ट हाफ में करनी चाहिए, जो छोटी-छोटी चीजें हैं वह सेकंड हाफ में होने चाहिए इसको बिजनेस से बिजनेस में लाने का तरीका इंप्रूवमेंट लाते हो, मल्टीपैथिंग से आप मेंटेनेंस करते हो बड़े कामों पर कैसे फोकस हो सकती है, उसी पर बात हो रही है आप तय करो कि आज दिन में मैंने क्या किया और मैं क्या नहीं कर पाया और मुझे कल क्या करना है

Restructuring the business model-अपने बिजनेस मॉडल को रिस्ट्रक्चर करो

डॉक्टर, लॉयर, चार्टर्ड अकाउंटेंट जितना काम करते हैं उतना ही कमाते हैं अगर आप यह बिजनेस मॉडल को समझ गए, अगर अपने दफ्तर में नहीं भी रहेंगे तब भी कमाएंगे  इसको कहते है “पैसिव इनकम- इज मस्ट” जो आपकी पैसिव इनकम है उसमें आपकी रॉयल्टी, इंटरेस्ट इनकम, रेंटल इनकम, सब्सक्रिप्शन इनकम, बिजनेस ओनरशिप इनकम,

जो कमजोर बिजनेस है वह सेल्फ एंप्लॉयड है जितना गल्ले में बैठेंगे उतना ही कमाएंगे या बेचेंगे तब कमीशन कब आएंगे या केवल नौकरी करते रह जाएंगे, “फाइनैंशल फ्रीडम” लाने के लिए पैसिव इनकम जनरेट करना है और उसके लिए आपको केवल 5 प्रश्नों का उत्तर देना है-

1- जो आप बिजनेस कर रहे हो क्या उसमें इमीडीएटली आपको कैश मिलेगा, 2-क्या आपके बिजनेस में रेगुलर कैश मिलता है कि नहीं 3- आप को सस्टेंनेबल कैसे मिलेगा या कभी कम या ज्यादा मुनाफा होगा 4- क्या आप का कैश-फ्लो आगे बढ़ता है या बढ़ता रहेगा या आगे घटता भी सकता है 5- क्या आपका पर्सनल टाइम लगेगा और क्या पर्सनल टाइम के बिना कर सकते हैं

CEO’s office in the absence of CEOCEO’s ऑफिस इन द एब्सेंस ऑफ सीईओ- इसका मतलब (एक CEO’s ग्रुप बनाओ)- क्या हुआ CEO नहीं ऑफिस में, लेकिन फिर भी ऑफिस रन कर रहा है, कुछ लोगों को इतनी राइट से दो कि वह आपके बिहाफ कोई डिसीजन ले सके और सारे डिपार्टमेंट को ड्राइव कर सकें,

इससे फायदा क्या होता है, आप टाइम मैनेज कर सकते हो, जिस मीटिंग को प्रयोटी देना है उसको अटेंड कर सकते हो, अनप्रॉडक्टिव मीटिंग छोड़ सकते हो, वह आपके बिना अन्य लोग रन कर लेंगे मीटिंग, आपको नोटिफिकेशन दे देंगे की मीटिंग कब खत्म हुई, अपना ध्यान तरक्की  पर फोकस करो

अगर CEO’s नहीं होगा तो सारे काम आपको खुद करने पड़ेंगे, अगर आपका ऑफिस में लोग आपके बिहाफ में ड्राइव नहीं कर रहे हैं, बिज़नस हमेशा डिक्लाइन रहेगा, आपके प्रोफाइल में प्रोडक्टिविटी नहीं आएगी, कभी आपका स्टॉक चोरी हो रहा है, अगर आपको ग्रोथ ओरिएंटेड टेस्ट पर ध्यान देना है और तो आप इनोवेशन नहीं कर पाओगे, नया बिजनेस अपोर्चुनिटी नहीं देख पाओगे, नया बिजनेस स्ट्रेटजी नहीं होगी नया बिजनेस ग्रोथ नहीं होगी, तुम million-dollar हो नहीं सकता आपको PA – CEO’s और चीफ ऑफ स्टाफ तीन अलग-अलग चीजें होती है

अगर आपका ऑफिस छोटा है तो आप PA रखो, वह है जो आप का टाइम टेबल मैनेज करेगा, आपकी एक्टिविटीज मैनेज करेगा, आपकी अपॉइंटमेंट मेंटेन करेगा, आपके क्लाइंट कि फाइल मैनेज करेगा, आपकी मेल का रिप्लाई देगा, वह इस तरीके से मैनेज करेगा कि आपका टाइम हर प्रकार का ऑर्गेनाइजर होता है होता है “पर्सनल असिस्टेंट”

अगर आपका बिजनेस बढ़ रहा है तो आपको यह एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट जो नॉरमल एमबीए फाइनेंस होते हैं, चार्टर्ड अकाउंटेंट होते हैं, यह डैशबोर्ड बनाने में हेल्प करते हैं, यह आपके ऑफिस के अंबेसडर होते हैं जो डिसीजन लेने में आपकी हेल्प करते हैं ,यह सारी MIS रिपोर्ट बनाता है, एक्सल शीट बनाता है, यह देखता है कि कौन सा डिपार्टमेंट अच्छा चल रहा है और कौन सा खराब चल रहा है, रिव्यू करता है आपकी मदद करता है, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट देखता है

लेकिन अगर आपका बिजनेस काफी बड़ा हो गया तो हमें “चीफ ऑफ स्टाफ” लार्ज साइज बिजनेस के लिए और जब आपका बिजनेस ग्रो कर रहा हो तो आपको ऐसे लोगों की जरूरत पड़ती है, कि सारा डिपार्टमेंट सही चल रहा है, यह सारे के सारे डिपार्टमेंट में डॉट्स को कनेक्ट कर देता है, यह सारे डिपार्टमेंट को जोड़ देता है यह आपके राइट हैंड मैन की तरह काम करता है, यह आपका वह एडवाइजर होता है, यह आपके एनालिस्ट की तरह काम करता है, डिसीजन क्रिएटर होता यह सारे डिसीजन लाकर आपको दे देगा और फाइनल डिसीजन आपका हुआ

जब आप नहीं होते ऑफिस में, तो यही चलाता है ऑफिस को यह सारे लीडर्स के साथ, टाइम को मैनेज कर देता है, यह मीटिंग की प्रिपरेशन करा देगा आपके स्टेटसजी प्लानिंग और यह अगर कोई आपके पास इन्वेस्टर हो उसको भी सम्हाल लेता है   

तो ये 7 स्ट्रेटेजीज जो आपके बिज़नस के ग्रोथ के लिए आवश्यक है

Here are 7 strategies you can use to grow your business,

7 Strategies Grow your Business in Hindi

Increase Your Leads. You can grow your business by increasing the number of qualified leads,

Turn Prospects Into Buyers,

Identify Your Challenges,

Increase Sales,

Grow Your Profit Margin,

Spend Smart,

Remember Customer Referrals,

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