Introduction of SEO for Beginners in Hindi

Introduction of SEO for Beginners in Hindi
Introduction of SEO for Beginners in Hindi

Introduction of SEO for Beginners in Hindi-हमसे समझे की क्या है SEO और क्यों जरुरी है

Introduction of SEO for Beginners in Hindi

Introduction of SEO for Tutorial for Beginners in Hindi- ये एक बेरोगारी का ख़त्म करने का माध्यम भी बन सकता है, इसके लिए आपको कोई खास डिग्री की जरुरत नहीं है बस अभ्यास करते रहो, शायद आपको पता नहीं कि हमारे देश या विदेशो में SEO एक्सपर्ट की बहुत मांग है ये एक ऑनलाइन इनकम का स्रोत हो सकता है

में आपको आज ये विश्वास दिलाता हु की अगर आप इसको सही से समझ गये तो आप बीस से पचीस हज़ार पर मंथ तक कमा सकते है बस लगन होनी चाहिए, में आपको इसमें शुरु से आखरी तक बताऊंगा कि आप किस प्रकार अपना विकास कर सकते है और मुझे यकीन है कि इसके बाद आपको कोई और पोस्ट पढ़ने की आवश्यकता नहीं होगी क्युकी इसमें मैंने लगभग सभी टॉपिक को कवर करने की कोशिश की है, आपको एक बेसिक आइडिया मिल जायेगा की आखिर SEO किस चिड़िया का नाम है, तो इसी आशा के साथ शुरु करते है

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जैसा की आप जानते ही है कि गूगल दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है और इसके कुछ पैरामीटर होते है उन पैरामीटर को हम एल्गोरिथ्म या उसका एक तरीका जिससे वह जाँच करता है कि किस वेबसाइट को अच्छी रेंकिंग देनी है और किस को ब्लाक करना है , अब यह एल्गोरिथ्म बिल्कुल सीक्रेट है, जिसको जैसे लिए समझ आ गया उस दिन वह गूगल को खराब कर सकता है, तो गूगल का जो सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन है, अगर हमें गूगल में सर्च करना है किसी चीज को तो हमारी साइड ऑप्टिमाइज कैसे करें उस पर बहुत सारी कंडीशन क्रिएट होती है

कई लोग इसको क्रेक करने की कोशिश करते है मगर गूगल और स्मार्ट है, जिस दिन गूगल लोगों को पता लगने लगता है कि गूगल के एल्गोरिथ्म कैसे काम कर रहे हैं तो ऑटोमेटेकली गूगल अपने एल्गोरिथ्म चेंज करता है ताकि कोई मैनिपुलेट ना कर पाए

SEO के तीन मुख्य पार्ट होते हैं एक होता- सर्च इंजन, दूसरा होता- क्वेरीज जो आप सर्च करते हैं और तीसरा होता वेबसाइट रिजल्ट, जो आपको सर्च में टाइप करने के बाद दिखाई देता है SEO का सिंपल सा डेफिनेशन है कि आपकी वेबसाइट को सर्च इंजन के लिए इस तरीके से ऑप्टिमाइज किया जाए कि कि उसके टारगेट कीवर्ड्स से ऑर्गेनिक या फ्री ट्रेफिक मिल सके |

इसके अलग-अलग फैक्टर हो सकते हैं कोई कंपनी अपने ब्रांड अवेयरनेस के लिए SEO करना चाहती है या कोई बंदा अपनी अफ्फिलियेट मार्केटिंग के लिए SEO करता है

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What is SEO (Search Engine Optimization) – क्या आपको पता है की SEO क्या है और ये किस प्रकार से काम करता है आपकी वेबसाइट को रेंक करने में मतलब ये ऐसी प्रोसेस है जो आपके द्वारा बनाये गये कंटेंट को या यूट्यूब चैनल के वीडियोस को इन्टरनेट की दुनिया में फैला देता है, मान लीजिये आपने कोई कंटेंट लिखा है या कोई यूट्यूब चैनल बना कर उसमे कोई वीडियोस डाले है तो वो पब्लिक को पता कैसे चलेगा की आपने कुछ काम किया है तो इन सब कामो को करने के लिए SEO आपको मदद या गाइड करता है कि किस तरह का कंटेंट लोग पसंद कर रहे है, SEO आपको मदद करता है ट्रैफिक या कोई विजिटर बढ़ाने के लिए वो भी फ्री में अब आप समझ ही गये होंगे कि कितना इम्पोर्टेंट है ये पार्ट जो फ्री में ट्रैफिक बढ़ाने में आपको सहायता करता है आइये अब इसके बारे में विस्तार से जानते है

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SEO- Seo search engine optimization (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन)

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अब आपके उस पोस्ट को पढ़ने या विडियो देखने को, उसके तीन तरीके हो सकते है 1- पहला तरीका है कि आप अपने सारे सोशल मीडिया ग्रुप, व्हाटशप में, या अपने दोस्तों, रिश्तेदार को उस कॉन्टेंट या विडियो का लिंक भेजो और कहो की  कांटेक्ट पढो या विडियो देखो और बाकि अन्य लोगो को भी भेजो, तो इसमें आपको कम ही सफलता मिलेगी मुक्स्किल से सो, पचास

दूसरा तरीका होता है आप उसके विज्ञापन चलाओ, चाहे फेसबुक में हो या गूगल में, ताकि आपको विजिटर मिले या आपके यूट्यूब चैनल में व्यूज बढ़े, लेकिन ये बहुत खर्चीला प्लान है इसमें बहुत अच्छा खासा पैसा खर्च होता है और फिर भी सफलता मिलना कठिन है

तीसरा तरीका आता है- ऑर्गेनिक सर्च से आप कई सारे अननोन विजिटर मिल सकते हैं वह भी फ्री में

SEO के मुख्यतः तीन पार्ट होते है

  1. Technical /On Site Seo
  2. On Page Seo
  3. Off Page Seo/ Backlinks

आइये अब एक एक कर इसके बारे में जानते है Introduction of SEO for Beginners in Hindi

Technical /On Site SEO- इसको ऑन साइड एस.ई.ओ. भी बोल सकते हैं, आपकी वेबसाइट में कॉन्टेंट को छोड़कर बाकी जो काम करना होता है उसको टेक्निकल या ऑनसाइट एस.ई.ओ. कहते हैं इसके भी कुछ पार्ट होते है

  1. Domain Name and Server- डोमेन नेम और सर्वर लोकेशन- आपके डोमेन में कीवर्ड है या नहीं, आपके सर्वर लोकेशन- अगर आप का टारगेट लोकेशन इंडिया है तो सर्वर लोकेशन भी आपकी इंडिया में ही होना चाहिए मतलब ऐसा डोमेन नेम जो आपके कार्यो को दर्शाता हो तथा आपका बेब सर्वर नजदीकी हो वर्ना साइड ओपन होने में समय लेगी
  2. Page speed- बहुत ज्यादा मैटर करती है, आपका वेबसाइट कितना तेज ओपन होती है और यूजर को वेट तो नहीं करना पढ़ रहा है, मतलब आपकी साइड लोड ही नहीं हो रही और यूजर झुझला तो नहीं रहा, इससे आपकी साइट पर बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है, और ये गूगल की नजर में एक गलत Sign. है क्युकी गूगल नहीं चाहता की उसका यूजर को कोई परेशानी हो या यूजर एक्सपिरियंस खराब हो
  3. Architecture- आपकी साइड का Architecture (फ्रंट फेस) कैसा है, आपके साइड में आपका नेविगेशन बार सही से डिस्प्ले होना चाहिए, बैकग्राउंड आदि सही से डिस्प्ले होनी चाहिए
  4. SSL- सर्टिफिकेट- का भी बहुत बड़ा रोल होता है जिससे आपकी साइड सिक्योर होती है
  5. 404 एरर- अगर आपकी वेबसाइट से कोई पेजेस है जो आप किसी पोस्ट को डिलीट कर देते हैं या आपने किसी अन्य की साइड में लिंक भेजा, आपको फोर जीरो फोर दे सकते हैं या आप किसी पेज को रिमूव कर देते हैं तो ऐसे पे जिसको आपको अवॉयड करना चाहिए, गूगल के क्रॉलर को ये एरर देखता हैं तो यह भी आपकी साइट के लिए अच्छे नहीं है
  6. Broken Links (ब्रोकन लिंक्स) – आपको पता करना होता है आपकी साइड से कौन कौन से लिंक बाहर की वेबसाइट में जा रहे है और वो वेबसाइट कैसी है, कभी-कभी अगर वह वेबसाइट साइड डिलीट हो जाती है तो ऐसे में यह ब्रोकन लिंक्स बन जाते है तो ऐसे ब्रोकन लिंक को फाइंड आउट करिए
  7. Mobile Friendly- आजकल मोबाइल का जमाना है किसी भी वेबसाइट को लोग डेस्कटॉप के बजाय लोग इसके बाद अब मोबाइल में देखना पसंद करते है तो, आपकी जो वेबसाइट है वह मोबाइल फ्रेंडली होनी चाहिए, थीम रेस्पॉन्सिव होनी चाहिए, आजकल तो सभी मोबाइल को ही यूज करते हैं इसलिए आपकी वेबसाइट को मोबाइल फ्रेंडली होना चाहिए.
  8. HTML या XML- आपकी वेबसाइट की कोडिंग में अगर ये फाइल्स मिसिंग है तो उनको सही करिए, यदि इसमें कोई प्रॉब्लम हो सकती है, यह आपके गूगल वेब-मास्टर टूल उसके अंदर आप चेक कर सकते हैं, वहां पर सारी एचटीएमएल टैग के बारे में मालूम पड़ सकता है, HTML या XML रोबोट फाइल यह सर्च क्रॉलर के लिए बहुत जरूरी है यह आपकी वेबसाइट का इंट्रीकेट होता है, आपको परमिशन देनी होती है कि कौन सी डायरेक्टरी को ब्लॉक करना है या नहीं, उसको सर्च में दिखाना है या नहीं, और
  9. Site Map- साथ ही आपकी वेबसाइट में साइटमैप बहुत इंपोर्टेंट होता है, आपकी वेबसाइट का मेन पार्ट होता है बेसिकली बहुत से प्लगइन होते हैं यूस्ट है या रेंक मैथ है आप इनको यूज कर सकते हैं अपनी साइड में इनस्टॉल कर सकते है
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On Page SEO – ऑन पेज ऑप्टिमाइजेशन- आप को इसमें अपनी इंडिविजुअल वेबसाइट को पेजेस को अपडेट या मैसेज करना होता है, आपके पेज के हर कॉन्टेंट को, मैटा टाइप को ऑप्टिमाइज करना होता है आप जब भी कोई पोस्ट अपनी साइट पर पब्लिश करते हैं तो यह चैट लिस्ट हमेशा देखेगा

  1. क्वालिटी कॉन्टेंट इंगेजिंग एंड सेटिस्फाइंग कॉन्टेंट और ऑप्टिमाइज कीवर्ड प्रायमरी एंड सेकेंडरी कीवर्ड- इसमें एक मेन हेडिंग्स होनी चाहिए जिसको हम H1 कहते है जो आपके कीवर्ड को दर्शता है
  2. सब-हेडिंग्स- इसके बाद सब-हेडिंग्स आती है जो कि H2 H3 से H6 तक होती है, जो आपके कांटेक्ट को बहुत ही खूबसूरत बनाती है
  3. इमेज- इसके बाद आप एक अच्छी सी लाइट इमेज यूज कर सकते हैं या इमेजेस को कंप्रेस कर सकते हैं, जो वेबसाइट लोड होने में परेशानी न हो क्युकी आपकी इमेज जितनी लाईट होगी उतनी जल्दी वेबसाइट ओपन होगी
  4. इंटरनल एंड एक्सटर्नल लिंक्स- आज जब भी कोई पोस्ट लिखते हैं तो उस पोस्ट के अंदर इंटरनल और एक्सटर्नल लिंक होनी चाहिए मतलब इंटरनल- आपकी अपनी साइट का कोई कांटेक्ट का लिंक और एक्सटर्नल का मतलब कोई जो बाहरी वेबसाइट या आपका जैसे फेसबुक पेज है या यूट्यूब का चैनल है उसको आप चैनल लिंक के रूप में यूज कर सकते हैं
  5. शोर्ट यू.आर.एल.- उसके बाद शॉर्ट यूआरएल जितना आपका शॉर्ट यूआरएल होगा उसके लिए बेनिफिट होगा
  6. मैटा टाइप- कंटेंट का टाइटल (आपका कीवर्ड) और मैटा डिस्क्रिप्शन यह एकदम आकर्षक होना चाहिए, आपके जो कीवर्ड है वो मैटा डिस्क्रिप्शन में ऐड होने चाहिए अगर आपकी पोस्ट में यह प्रॉपर तरीके से है तो मतलब आपका ऑन पेज परफेक्ट है आपकी वेबसाइट अगर वर्डप्रेस में है तो योस्ट एक बेस्ट प्लगइन है, जो आपको ऑन पेज करने के लिए बहुत ज्यादा हेल्प कर सकता है

ऑन पेज का seo करना सरल होता है बस थोड़ा सा प्रैक्टिस के बाद आपको आप आदी हो जाते हैं उस काम करने के अगर आपका कांटेक्ट सही से ऑप्टिमाइज है तो आपके वेबसाइट साइड रेंक तो हो जाती है लेकिन बहुत सारे कीवर्ड ऐसे होते हैं ऑन पेज seo करने से रेंक के नहीं होते उनके लिए बहुत अलग टेक्निक होती है

Off Page SEO/ Backlinks- अब आते हैं थर्ड ऐसी वो ऑफ पेज SEO जैसा कि नाम से ही पता लगता ऑफ पेज मतलब जो बैकग्राउंड में होता है इस का दूसरा नाम है लिंक बिल्डिंग भी है, गूगल के सभी फैक्टर में से लिंक बिल्डिंग का बहुत बड़ा महत्व है, बैकलिंक्स का मतलब है कि इंटरनेट में जो करोड़ों वेबसाइट है उनमें से कौन आपको लिंक कर रहा है

आपको अपनी वेबसाइट में बैकलिंक्स बनानी होती है इसे गूगल के लिए वोटिंग की तरह होता है, जितनी ज्यादा बैकलिंक्स इतनी ज्यादा वोटिंग है आप के पक्ष में जैसे चुनाव में

चुनाव में हर वोटर की वोटिंग एक प्रकार की होती है लेकिन गूगल के एल्गोरिथ्म मैं यहां हर वेबसाइट के हिसाब से अलग-अलग होती है किसी की बैटलिंग की वैल्यू बहुत हाई हो सकती है किसी की एवरेज हो सकती है और किसी की वैल्यू नहीं करती भी हो सकती है

गूगल आपकी वेबसाइट को 5 सेक्टरों में बाँटता है (शायद ये मेरा अनुमान है) Introduction of SEO for Beginners in Hindi

पहला है- अच्छा SEO हो, अगर आपने अपनी पोस्ट में अच्छी तरीके से लिखी होती है तो आपकी पोस्टर रैंक कर सकती है

  1. दूसरा है सोशल शेयर या वायरल- आपकी वेबसाइट में ऐसा एक ऐसा कंटेंट है जो एकदम वायरल होता है, जो आपको फेसबुक, व्हाट्सएप या अन्य प्लेटफार्म में दिखाई देता है, तो गूगल आपकी साइट को रेंक कर देता है अब ये जरुरी नहीं है कि वो सकरात्मक या नकारात्मक
  2. तीसरा होता डोमेन अथॉरिटी- गूगल की नजर में अगर आपकी वेबसाइट अथॉरिटी है यह किसी पार्टी कूलर निस को लेकर हो तो गूगल आप की जो भी नई पोस्ट, जो आप पब्लिश होती है आपकी द्वारा, अगर वह कीवर्ड डिफिकल्ट नहीं है तो आपकी पोस्ट को रेंक करवा सकता है सिर्फ आपके अथॉरिटी की वजह से
  3. चौथा होता लो कंपटीशन या नो कंपटीशन- मतलब कोई कंपटीशन नहीं आया या बहुत कम कंपटीशन है तो भी आपकी पोस्ट या आपकी वेबसाइट रेंक कर होती है
  4. पांचवा होता है एक्सपेरिमेंट- गूगल एक्सपेरिमेंट करता रहता है और नई-नई वेबसाइटों को भी रेंक करता है, जो SEO नहीं कर पाती हैं, उनको चांस देता है कि कौन सी पोस्ट बिना SEO रैंक होनी, चाहे किसी भी वजह से पोस्टर रेंक करें

लेकिन एक बात और वह वेबसाइट की पोस्ट सदा के लिए फर्स्ट पेज में टिकी रहे यह डिपेंड करता है उस वेबसाइट और उस पोस्ट के इंगेजमेंट पर इसलिए आपका सबसे ज्यादा फोकस कॉन्टेंट पर होना चाहिए बात यह नहीं है कि आपका कांटेक्ट दुनिया का सबसे बेस्ट होना चाहिए बल्कि सही से SEO होना चाहिए

गूगल एक मशीन है जो बेस्ट और मोस्ट में अंतर नहीं समझता गूगल, वो समझता है, केवल इंगेजमेंट को, आप ऐसे सुंदर लिखिए जो यूजर को सही से सेटिस्फाई करें जब वह आपकी वेबसाइट पर आए, चाहे कांटेक्ट एकदम ओरिजिनल हो या न हो

आइये अब और विस्तार से बात करते है इस विषय में

आपको SEO सुरु करने से पहले कीवर्ड रिसर्च जरुरी है – अब बात ये है की हमको कीवर्ड रिसर्च क्यों करनी है वो इसलिए इससे हमें पता लगता है की सर्च वॉल्यूम क्या है और कॉम्पीटिशन कितना है, जब आपके पास कीवर्ड की अछी खासी लिस्ट आ जायगी तो आपको पता लग जायेगा कि मुझे किस कीवर्ड पर काम करना आसन होगा, अब आपका कंटेंट भी उसी प्रकार का होना चाहिए ये दो प्रकार से होती है

1 ऑफलाइन कीवर्ड रिसर्च – इसमें आप अपने आसपास की चीजो को देख कर कर सकते हो जैसे की आजकल क्या माहोल चल रहा है या आपके बिज़नस में किस चीज की डिमांड हो ज्यादा हो रही है या लोग क्या सर्च कर सकते है, आपने जानकार लोगो से पूछ सकते हो की आज कल उनके इलाके में क्या चल रहा है और सबसे ज्यादा आपके कस्टमर जो आपको नई नई जानकारी देते है फीडबैक के माध्यम से या फिर आप कस्टमर के सर्वे करवा सकते हो इस तरह से आप ऑफ-लाइन कीवर्ड रिर्सेर्च कर सकते हो

2 ऑनलाइन कीवर्ड रिसर्च- आजकल बहुत सारे फ्री और पे रिसर्च टूल मार्किट में उपलब्ध है इसका फायदा क्या होता है अब इस बारे में बात करते है, इससे हमें पता लगता है कि आजकल पब्लिक का ट्रेंड क्या चल रहा है, हम जो सोच रहे थे उससे संबंधित क्या क्या सर्च को रहा है मार्किट में, ये भी पता लग जाता है की किस सर्च की लोकेशन क्या है मतलब किन किन शहर में सर्च हो रहा है तथा ये भी पता लग जाता है की इस कीवर्ड की वैल्यू क्या है और कितने लोग सर्च कर रहे है इनमे मुख्य है Introduction of SEO for Beginners in Hindi

  1. Google Keyword Planner- free
  2. Google Trends- free
  3. Google Autocomplete- free
  4. Aherfs- Paid
  5. Semrush – Paid
  6. Ubersuggest– Paid
  7. LongTailPro– Paid

अब गूगल भी एक वेबसाइट ही है तो गूगल ने सबके लिए एक वेबसाइट बनाई है “गूगल वेब मास्टर टूल”, अगर आप कोई वेबसाइट बनाते हैं ,तो सबसे पहले आप जाइए गूगल वेबमास्टर पर और गूगल को बता दीजिए कि मैंने एक नई वेबसाइट बनाई है, इस पार्टिकुलर चीज के ऊपर है, आप अपने एल्गोरिथ्म यूज़ करिए और अपनी कोडिंग को यूज़ करके मेरी वेबसाइड को रेंक करिए

Website Structure-  Navigation Bar- ये On Page का मुख्य भाग है, मलतब ये हमारी वेबसाइट के अन्दर के भागो को दर्शता है, जिसको हम नेविगेशन बार बालते है, इसमें हमारा Home, About us, Contact us, Private Police Our service आदि पेजेज को दर्शाया जाता है मतलब आप अपनी वेबसाइट के हिसाब से लगा सकते है की आपकी वेबसाइट किस विषय पर आधारित है लेकिन ये ध्यान रखे की आप जो भी नेविगेशन बार में शो करे वो उसी लिंक में खुलनी चाहिए ऐसा न हो सर्विस पर क्लीक किया और खुल रहा अबाउट अस, इन एक्सपीरियंस गूगल को ख़राब मानता है, इसमें एक परेंट्स और उसके अन्दर के पेज को चाइल्ड कहते है जैसे सर्विस है परेंट्स और उस पर टैब करने पर हमारी सारी सर्विस के अलग अलग पार्ट होंगे, हमारी वेबसाइट में Home, About us, Contact us, Private Police ये पेज होने बहुत आवश्यक है और स्पष्ट रूप से दिखने चाहिए , इससे गूगल को लगता है की आप यूजर से कोई बात छुपा नहीं रहे है

Content- हैडिंग को हम H1 कहते है जो मेन कीवर्ड है हमारा ये हैडिंग H1 से H6 तक होती है जिसको गूगल को समझने में आसानी हो, अपनी सब हैडिंग को H2 या अन्य दे सकते हो, इससे होगा ये की ये यूजर और गूगल के लिए आसान होता है मतलब यूजर उस हैडिंग से समझ जाता है की इस पैराग्राफ में क्या लिखा है. आप जितना इस बात का ध्यान रखंगे तो आपका कंटेंट या वेबसाइट रेंक होने की सम्भावना बहुत बड जाती है और गूगल में क्रोल होगा

Meta Tags- ये दो प्रकार की होते है टाइटल टेग और मेटा टेग, टाइटल टेग को आप हड्डिंग भी कह सकते है और मेटा टेग का मतलब है की आपने ने जो टाइटल में देय है उसका विस्तार क्या है या आप कहना क्या चाहते हो उसको कुछ संशिप्त में बताओ ये दोने ही जरुरी है अगर आप अपनी वेबसाइट को रेंक करवाना चाहते है और इससे गूगल या यूजर को आपकी सही पहचान देता है

Internal Links- ये वो लिंक होते है जो हमारी वेबसाइट के अन्य पेज या अन्य कंटेंट का लिंक होता है, ताकि यूजर वर्तमान कंटेंट को के साथ साथ अन्य पेज या कंटेंट की जानकारी मिल सके, ये बहुत जरुरी होता SEO में

External Links या Out Bond – ये वो लिंक होते है जो हमारी वेबसाइट में बाहरी होते है मतलब ऐसे लिंक जो हमारे YouTube या Facebook पेज के है या हम Others वेबसाइट के लिंक हो सकते है (हमारे Affiliate लिंक भी हो सकते है)

Images- हमारी वेबसाइट में Images होनी बहुत जरुर होनी चाहिए जो हमारे कंटेंट का अच्छा लुक देती है और इस बात का भी ध्यान रखे की वो इमेज उस  कंटेंट से ही रिलेटेड हो ना की फालतू की मतलब अगर आपका कंटेंट फ़ूड का है और आपने इमेज लगा दी किसी हीरो या किसी जानवर की वो नहीं चल पायेगा क्युकी दोनों का कोई सम्बन्ध नहीं है और साथ है Alt-tag भी देना सही होता है और साथ ही आप लिंक का भी यूज़ कर सकते है ताकि कोई अगर उस इमेज को क्लीक करता है वो उससे संबंधित कंटेंट ओपन हो जाये, इसको हम इमेज opt कहते है

Robot. Text- इसका भी काफी बड़ा रोल होता है मतलब ये कि हमको कुछ परमिशन देनी होती है गूगल या किसी भी अन्य सर्च इंजन को, की आप हमारी वेबसाइट में आइये और जो हमने कंटेंट लिखा है उसको को दुनिया तक फैला दो तो जब भी इन सर्च इंजन के क्रोलर आयंगे तो आपके कंटेंट को फैला देंगे इन्टरनेट पे, अगर हम चाहते किसी पेज को डिसअलाव करते है तो कोई भी सर्च इंजन उसको क्रोल नहीं करेगा मतलब वो पेज या कंटेंट पब्लिक को नहीं दिखाई देगा चाहे वो आपकी वेबसाइट हो या न हो

Do-Follow and No-Follow Links- ये एक प्रकार का हाईपर लिंक होता है 1-Do Follow लिंक- ये वो लिंक होते है जो अन्य वेबसाइट हमारी वेबसाइट को अपने साथ लिंक करती है जिनका मतलब ये other वेबसाइट ये गारंटी लेती है कि हमारी वेबसाइट ठीक है या इसका कंटेंट ठीक है और other साईट अपना लिंक जोड़ कर आगे बढ़ा देती है वो होता है डू फॉलो लिंक

2-No Follow लिंक- ये वो लिंक होते है जिसकी other वेबसाइट ये गारंटी नहीं लेती है मतलब हम किसी भी वेबसाइट में जाकर कमेंट या किसी भी और तरीके के जरिये अपनी वेबसाइट का लिंक पास कर देते है, इस पर other साइड कहती है कि में नहीं जानती इसे तो उस को हम नो फॉलो लिंक कहते है

गूगल इस बात पर बहुत ध्यान करता है कि हमारी वेबसाइट में कितने Do-Follow या No-Follow Links है, इस बात का ध्यान रखे कि Do-Follow या No-Follow Links विस्वसनीय होने चाहिए मतलब किसी इललीगल से कोई भी सम्बन्ध ना रखे वर्ना आपकी रेंकिंग असर पड़ेगा- हा ये जरुर है किसी भी वेबसाइट से आपके पास तक आ ही जाती है

SEO Friendly URL- यूआरएल मतलब हमारी साइड का नाम जैसे Google.com, YouTube.com मतलब हमको जो डोमेन लेना है एक तो वो हमारे विषय को दर्शाता हो, स्माल हो ताकि एक दम लोगो के दिमाग या जुबान पे आये और इस बात का भी ध्यान रखे की कठिन भाषा में ना हो या  लौंगटेल न हो जो कि लोगो की समझ में आये. इसके साथ ही जब आप अपनी वेबसाइट का कोई सबडोमेन बनाये तो पहले आपकी साइड का नाम आये फिर \ सबडोमेन का नाम आये जैसे helloworld\service.com ये सही मेथड है ना कि service\helloworld.com ये हो और एक बात और url हमेशा स्माल लेटर में ही होना चाहिए

इन सबके साथ साथ आपको एक बात का और ध्यान रखना है की हमको अपनी वेबसाइट का बाउंस रेट कम रखना है मतलब कोई भी यूजर अगर हमारी वेबसाइट में आये तो तुरंत ही न भाग जाये बल्कि कुछ देर रुके वर्ना गूगल को लगेगा की इस वेबसाइट में कुछ प्रॉब्लम है इसी वजह से लोग भाग जा रहे है अगर आपको अपनी वेबसाइट को रैंक कराना है, तो गूगल के एल्गोरिथ्म को सेटिस्फाई करना होता है स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस फॉलो करना होता है, मतलब है कि सर्च इंजन में वेबसाइट को रैंक करवाना इस एल्गोरिथ्म में 200 से भी ज्यादा सिग्नल होते हैं जो कि गूगल यूज करता है, डीसाइट करता है कि किस कीवर्ड से कौन सी साइट रैंक होनी चाहिए, इनमे से हर फैक्टर की इंपॉर्टेंस एक नहीं होती है किसी फैक्टर का इंपॉर्टेंस बहुत ज्यादा होता है किसी का बहुत कम होता है

अब होता यह है कि दुनिया में हर सेकंड कई करोड़ों वेबसाइट बनती हैं और अगर कोई वेबसाइट एक कीवर्ड पर रेंक कर जाती है तो वह जिंदगी भर रैंक नहीं रहती और कंपटीशन बढता है और वेबसाइट पुश करती हैं कि उसकी वेबसाइट नीचे आए, और हमारी ऊपर जाए, यह सारी चीज कंट्रोल होती है गूगल के “एल्गोरिथ्म” से

Introduction of SEO for Beginners in Hindi-उसके सिस्टम को सारी चीजें ऑटोमेशन चलती है एक ब्लैकहेड SEO और एक वाइटहेड SEO वाइटहेड- वह होता है जिसमें हम कुछ नहीं करें, हमने अपनी साइड गूगल को दे दी अब ये गूगल की जिम्मेदारी है कि हमारी जो वेबसाइट है उसको रैंक करें और ब्लैकहेड- ऐसे होता है हम गूगल को फ़ोर्स कर रहे हैं उसके कोडिंग को फ़ोर्स कर रहे हैं, उसके एल्गोरिथ्म को फोर्स कर रहे हैं कि मेरी वेबसाइट इस कीवर्ड पर रैंक हो तो ये Introduction of SEO for Beginners in Hindi