Pricing strategy adopted during coronavirus lockdown in Hindi

Pricing strategy adopted during coronavirus lockdown in Hindi
Pricing strategy adopted during coronavirus lockdown in Hindi

Pricing strategy adopted during coronavirus lockdown in Hindi इस लॉकडाउन के दौरान आपकी क्या तैयारी होनी चाहिए

अगर आप कोई बिज़नस या शोरूम को शुरु करना चाहते है तो कुछ बातो का ध्यान रखना जरुरी है ताकि आपको कोई परेशानी का सामना न करना पड़े और आपका ब्यापार तेजी से नई नई ऊचाई को छुए आपको कुछ टिप्स देने जा रह है

प्राइस क्या हो – सभी लोग अपने बिज़नस में प्राइस को अलग अलग तरीके से पेश करते है आज हम इन्ही का विशलेषण करेंगे कि प्राइस कितने प्रकार के होते है और इनका कहा कहा पर यूज़ होता है

  1. कास्ट प्लस प्राइसिंग स्ट्रेटेजी 100 का माल लाओ और उस पर 110 या 120 का अपना टेग लगा दो | ये सबसे सरल तरीका है, नए दुकानदार अक्सर इस ही तरीके को अपनाते है | शुरु में यह बहुत कारगर है क्युकी लोगो का फुटफॉल बढाना है क्युकी जब लोग आना शुरू हो जाय तो अन्य तरीके अपना सकते है |
  2. फिक्स प्राइसिंगकई स्टोर फिक्स प्राइस में अपना माल बेचते है, वहा केवल उसी प्राइस में माल मिलेगा जितना वहा पर फिक्स है जैसे स्टोर 99- यहाँ सभी सामान 99 में ही मिलेगा ना कम ना ज्यादा, फिक्स रेट |
  3. लो प्राइसिंग कई स्टोर लो रेट में अपना सामान बेचते है जो भी डेली नीड का सामान हो या फिर बड़े स्टोर से आउट-डेटेड या आउट-ट्रेंडइंग या डी-इफक्टिव माल को अपने छोटे स्टोर में सेल करते है जो कम्पनी सस्ते रेटो में दे देते है |
  4. हाई प्राइसिंग– कई स्टोर अपने सामान को केवल हाई रेट पर ही सेल करते है क्युकी उनके सामान की क्वालिटी ही इतनी बढ़िया होती है कि उनके सामान की लागत ही इतनी बढ़ जाती है कि उनको माल सस्ते में देने में मार्जिन ही न बचता |
  5. हाई-लो प्राइसिंग- शुरू में महंगे आइटम्स, फिर धीरे धीरे प्राइस कम उदाहरण- जैसे एप्पल आइ-फोन पहले एक लाख का आयेगा, फिर धीरे धीरे दाम कम होने लग जाते है |
  6. सीजनल ट्रेंड्स प्राइसिंग– आप सीजनल ट्रेंड्स को भी फोलो कर सकते हो जिस प्रकार बड़े बड़े मॉल में गर्मियों के कपडे सर्दियों में सस्ते और सर्दियों के कपडे गर्मियों में सस्ते होते है | इससे होता ये है कि स्टॉक जल्दी से समाप्त हो जाता है और नया स्टॉक के लिए जगह और पैसा मिल जाता है और कस्टमर को फायदा भी मिल जाता है |   |
  7. कम्पटीशन बेस्ड प्राइसिंग– कम्पटीशन को समझो, की कितना है अपने प्राइस को और लोगो के मुकाबले कम रखो अपने मार्जिन को ध्यान में रखते हुए | जो ज्यादा बिकती है उस पर डिस्काउंट दे दो और पहले ट्राफिक गेन कर लो क्युकी एक बार कस्टमर आने लग गये तो सेल अपने आप हो जायगी |
  8. प्रीमियम प्राइसिंग– इसको आप साइकोलॉजीकल प्राइसिंग भी कह सकते है, कई बार लोगो के दिमाग में ये बात बेठ जाते है कि महंगा है तो अच्छा हो होगा बट क्वालिटी इज मस्ट जैसे नाइकी, अडिड़ास, पोलो आदि | ये खास आइटम्स पर ही चलता है जो केवल हमारे पास हो |
  9. पेनेट्रेसन प्राइसिंग– ये तब होता है जब कम्पटीशन को समझ कर मार्किट में इंटर होने की तयारी में होते हो जैसे “जिओ” आया उसने सबसे पहले दाम सबसे कम कर दिए ताकि पहले मार्किट को गेन करलू, पहले सारे मार्किट पर कब्ज़ा हो जाय, फिर दाम बड़ा कर अपना लौस को कवर कर लूँगा और भी ओला, उबर आदि कई उदाहरण है जो इस तरह प्रयोग कर चुके है | ये मार्किट एंट्री में काम आता है, आपका कस्टमर बेस बड़ा हो जाय, सबकी भ्रमित कर दे अपने स्कीम से | लेकिन इसमें दिक्कत क्या है अगर आप इस तरह की प्राइसिंग में ज्यादा जाते रहे मतलब लगातार ये ही इस्तेमाल करते रहे तो आपके मार्जिन कम होने लग जायगे और खर्चा भी बड़ता जायेगा |
  10. फेस्टिवल बेस्ड प्राइसिंग – ये तकनीक फेस्टिवल सीजन में बहुत काम आती है, जैसे नेशन फेस्टिवल-26 जनवरी को 50+26% या फिर दिवाली, होली, ईद आदि के दिन की डेट के आधार पर- 50+22% आदि | ये केवल उसे दिन के लिए या लिमिटेड डेज के लिए मान्य होती है |  
  11. कांटेस्ट बेस्ड प्राइसिंग-  कई स्टोर कांटेस्ट बेस्ड प्राइसिंग भी करते है लोगो को फिक्स अमाउंट लेकर कांटेस्ट(प्रतियोगिता) में भाग लेना होता है और उनको प्राइज में कुछ डिस्काउंट मिल जाता है तथा अन्य को कोई डिस्काउंट नहीं मिलता है |
  12. कांटेक्ट बेस्ड प्राइसिंग-  कई स्टोर कांटेक्ट बेस्ड प्राइसिंग भी करते है लगातार आने वाले कस्टमर (रनिंग कस्टमर) को एक यूनिक कोड दिया जाता है और उनका काम होता है नए कस्टमर को स्टोर में लाना और स्टोर की सेल बढाना और उनको प्राइज में कुछ डिस्काउंट मिल जाता है तथा अन्य को कोई डिस्काउंट नहीं मिलता है |
  13. मेम्बरशिप बेस्ड प्राइसिंग- कई स्टोर कूपन बेस्ड भी करते है अपने रनिंग कस्टमर को कूपन या मेम्बरशिप देते है और उनके द्वारा हुई परचेज पर डिस्काउंट देते है तथा नए कस्टमर को भी मेम्बर बनने की सलाह देते है जैसे इजी-डे, विशाल मेगा मार्ट आदि |  
  14. एंकर प्राइसिंग-  इसमें इमोशनकाम करता है इससे साइकोलॉजीकल इम्पैक्ट आता है जैसे 1000 को 999.00 दिखाया जाता है |प्राइसिंग का सरल करना |
  15. बंडल प्राइसिंग- कई चीजो को बंडल कर दो मतलब कॉम्बो पैक | इसमें छोटी बड़ी सारी चीजो को कलप करना, एक एक्स्ट्रा वैल्यू क्रिएट करना ताकि लोगो को कम दाम में काफी चीजे मिल सके इससे होगा ये कि आपकी वो चीज भी सेल हो जायगे जो नहीं बिक रही थी |
  16. की-स्टोन प्राइसिंग- मतलब आपकी मर्जी का रेट, ये आप तब कर सकते हो वो स्टॉक केवल आपके ही पास हो या आपके पास कोई मूल्यवान प्रोडक्ट हो और जिसकी बाज़ार में बहुत डिमांड हो, तब आप ये प्राइस का यूज़ कर सकते है ये कुछ ही जगह पर यूज़ होता है |
  17. चार्म प्राइसिंग – ये एंकर प्राइसिंग का ही एक रूप है इसमें आप लास्ट में 9 लगा दो जैसे 99 या 199 या 499 या 999 | अब 200 रूपये और 199 रूपये में अन्तर तो 1 रूपये का है लेकिन लोगो के दिमाग में 100 और 200 की छवि अलग अलग हो जाती है |                        

लोकेशन– लोकेशन का बहुत महत्त्व होता है ये देखना भी बहुत जरुरी है कोशिश करो की प्राइम लोकेशन हो, पर ये भी ध्यान रहे की कि लीज पर लेना है या खरिदना है, रखरखाव कितना है और वहा पर लोगो की आवाजाही कितनी है मतलब ट्राफिक कितना है- लोग  पैदल वाले कितने है, वेहिकल कितने गुजरते है वहा से आदि लोगो के बारे में पता लगाइए की वहा की जनसंख्या कितने है, वहा कोन सा धार्मिक स्थान है, आपके प्रोडक्ट की डिमांड कितनी होगी और साथ ही वहा पर कॉम्पीटिशन कितना है | ये सब लोकेशन के मेजर फेक्टर है जो बहुत जरुरी है |

कॉल फॉर एसेंशियल – जब भी आप अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन करो तो यूज़फुल को प्रमोट करो अर्थात् इस पर बेहतरीन स्कीम लगाओ तो कस्टमर का फुटफॉल बढेगा तो आपका अन्य सामान अपने आप निकल जायगा, बड़े बड़े रिटेल स्टोर वाले इस फार्मूला को ही फोलो करते है |

प्रोडक्ट वेराइटी- लोकल मार्किट के हिसाब से माल बेचो, क्युकी जो लोगो की पसंद का होगा तो सेल अपने आप बढेगी, अपने ब्रांड वैल्यू को बढाओ लोग आपके प्रोडक्ट की क्विलिटी पर फोकस करो, सबसे पहले ये सोचो की लोगो को क्या चाहिए लोगो की नीड को समझो, ऐसा न हो लोगो की पहुच से बाहर का हो |

कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजी-  चाहे प्रिंट से, आडियो से, विडियो से, फेसबुक से, ई-मेल से या कोई भी माध्यम हो अपने विज्ञापन का सभी से प्रयोग करो तथा उसमे अपनी सर्विस, न्यू प्रोडक्ट मतलब अपने द्वारा किये जाने वाले हर इवेंट की जानकारी समय समय पर लोगो को बताते रहो ताकि वो आपको याद रखे और विज्ञापन ऐसा हो कि सबसे पहले आपकी ही याद आये | लोगो को कम्युनिकेशन करना महत्वपूर्ण है उनको यूज़फुल जानकारी दो जो उनकी प्रॉब्लम को सोल्व कर सके |    

फ्लेक्सी पेमेन्ट आप्शन – ये सबसे जरुरी है, आपने सेल तो कर दी लेकिन आप केवल कैश पर ही डिपेंड है तो मुश्किल हो जायगी क्युकी आजकल डिजिटल जमाना है लोग पर्स से ज्यादा ऑनलाइन को तरजीह दे रह है | डिमांड ड्राफ्ट, मनी-आर्डर या चेक ये सब पुराने मेथड हो गए है आजकल तो पेटीयम, गूगल-पे या रेज़र-पे आदि अन्य बहुत से साधन है जिसके माध्यम से पेमेंट हो जाता है अलग अलग तरीके से पेमेंट आप्शन को अपनाओ ताकि कस्टमर के पास कोई बहाना ही ही रह जाय |

एलिमिनेट द वेट-  आपको अपने पेमेंट पॉइंट का भी ध्यान रखना है क्युकी अगर आपका कस्टमर ज्यादा देर तक लाइन में लगा रहा तो वो बिना सामान लिए है चला जायगा,  सभी प्रकार के कस्टमर की एक ही आदत है कि चाहे वो सामान लेने में कितना भी देर लग जाये पर बिलिंग लाइन में ज्यदा देर उनको पसंद है इसका विशेष ध्यान रखे | अपने पीक आवर का ध्यान रखो की कस्टमर कब सबसे ज्यादा कब आता है, अपने स्टाफ को वेल ट्रेंड करो, पौस सिस्टम को एक्टिव रखो अगर लाइन लम्बी है तो नये पेमेंट पॉइंट को एक्टिव कर दो क्युकी कस्टमर को लाइन में इंतजार बहुत खलता है |

मिडिल ऑफ़ द रोड –  अगर आप कोई सामान बेचना चाहते है तो उसकी तुलना का महंगा सामान रख दो तो कस्टमर को लगेगा की मुझे महंगा सामान सस्ते रेट में मिल रहा है मतलब कम रेट और ज्यादा रेट सामान रख दो तो कस्टमर बीच के रेट का सामान खरीदेंगा |

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